जिले के बारे में

खगड़िया अनुमंडल के रूप में मुंगेर जिले का भाग था | वर्ष 1943-44 में खगड़िया को अनुमंडल बनाया गया | 10 मई 1981 को तत्काल प्रभाव से बिहार सरकार की 30 अप्रैल 1981 की अधिसूचना संख्या 7/T-1-207/79 के द्वारा इसे जिला के रूप में प्रोन्नत किया गया | आजादी के पूर्व प्राचीन मुंगेर जिला के अनुमंडल के रूप में खगड़िया, मुंगेर सदर, बेगुसराय और जमुई  था| जमुई अनुमंडल का निर्माण 22 जुलाई 1964 को एवं बेगुसराय अनुमंडल का निर्माण 14 फरवरी 1870 को हुआ|

खगड़िया को एक पृथक अनुमंडल के रूप में आवागमन की शुलभ सुविधा की कमी को मुख्य परेशानी के मददेनजर बनाया गया | इस जिला में रेलवे, आवागमन का सबसे पुराना साधन था | 1960 के गजट के अनुसार इस अनुमंडल में तीन रेलखंड थे – पूर्वोत्तर रेलवे जिसके अंतर्गत खगड़िया, मानसी , महेशखूंट और पसराहा चार स्टेशन थे, एक शाखा खगड़िया से ओलापुर एंव इमली जबकि दूसरी शाखा मानसी से सहरसा तक जाती थी | मानसी – सहरसा रेलवे लाइन वरसात के दौरान कत्यानी स्थान से कोपरिया तक की 6 किलोमीटर की दूरी नाव के जरिये तय की जाती थी | रेलवे के अलावे आवगमन का अन्य प्रमुख साधन सड़क मार्ग था जिसकी हालत बहुत ही जर्जर थी | एकमात्र पक्की सड़क महेशखूंट से अगुवानी घाट तक 22 किलोमीटर लम्बी थी जो उस समय निर्माणधीन ही थी | उस अवधि में खगड़िया-परिहारा-बखरी पथ भी निर्माणधीन था और मोकामा से असम तक राष्ट्रीय राजमार्ग विचाराधीन था |खगड़िया अनुमंडलीय क्षेत्र में पांच बड़ी नदियाँ यथा गंगा, गंडक, वागमती, कमला एंव कोशी की वजह से वार-वार बाढ़ आना एक वार्षिक घटना थी |

बार – बार बाढ़ आने से जल जमाव के कारण वर्षा ऋतू में यातायात अत्यधिक कस्टदायक हो जाता था | वागमती के दक्षिणी तटबंध एवं गोगरी-नारायणपुर तटबंध के निर्माण के पूर्व रेलवे लाइन एवं तीन धाराओ बागमती,कमला और घघरी (कोशी की मुख्य धारा) और मरिया तथा मैथा नदियों के बीच के क्षेत्र में बहुतायत में दलदल था |

कहा जाता है कि गंगा, गंडक, कमला, बागमती और कोशी नदियों की वजह से खगड़िया जिला का क्षेत्र दहनाल था | इसकी भौतिक अवस्थिति के कारण महत्वपूर्ण स्थल बर्बाद हो गया | इसलिए यहाँ एक भी ऐतिहासिक महत्व का स्थल नहीं है | इतिहास के अनुसार कहा जाता है की शासक अकबर के समय राजा टोडरमल को सम्पूर्ण भू क्षेत्र को पैमाइश की जिम्मेदारी दी गयी लेकिन वो ऐसा करने मे असफल रहे और उन्हौने सलाह दिया की इस क्षेत्र को पैमाइश में शामिल न करें | दुसरे शब्दों में उन्हौने ‘फरक किया’ की नीति अपनायी और इसलिए यह क्ष्रेत्र फरकिया परगना के रूप में भी जाना जाता है |